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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
ग्रामीण रोजगार और गरीबी उन्मूलन में मनरेगा योजना की भूमिका
Authors
दीपक नाथ, डॉ. हेमा
Abstract
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) (MGNREGA) ग्रामीण भारत में प्रति परिवार प्रति वर्ष 100 दिनों के गांरटीकृत अकुशल रोजगार के माध्यम से गरीबी उन्मूलन और बेरोजगारी कम करने का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह ग्रामीण विकास, टिकाऊ परिसंपत्तियों (सडक, जल संरक्षण) के निर्माण और न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित कर आजीविका को सुरक्षित करती है, जिसमें महिला सशक्तिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस शोध का ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का मूल्यांकन करना, आजीविका सुरक्षा को  बढ़ाना और योजना की प्रभावशीलता का विश्लेषण करना हैं। शोध का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कैसे मनरेगा को अधिक प्रभावी बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्थ को सुदृढ किया जा सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। यह कानूनी रूप से न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करती है, पलायन कम करती है, महिलाओं (1/3 अनिवार्य) को सशक्त बनाती है। यह सीधे तौर पर ग्रामीण परिवारों को आय प्रदान करती है, जिससे उनकी क्रय शक्ति बढती है, और गरीबी कम होती हैं। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर ही काम मिलने से शहरों की ओर होने वाला मजबूरन पलायन कम हुआ हैं। आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता पाने का कानूनी अधिकार भी देता है।' 
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Pages:10-13
How to cite this article:
दीपक नाथ, डॉ. हेमा "ग्रामीण रोजगार और गरीबी उन्मूलन में मनरेगा योजना की भूमिका". National Journal of Advanced Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 10-13
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