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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारत के विकास में धार्मिक पर्यटन का योगदान
Authors
पूनम देवी, अमित चमोली
Abstract
धार्मिक पर्यटन आज के समय में एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि बन गया है, जो न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है। यह शोधपत्र भारत में धार्मिक पर्यटन के योगदान का अध्ययन करता है, जिसमें प्रमुख धार्मिक स्थलों का आर्थिक प्रभाव, रोजगार सृजन, और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। शोध के परिणामस्वरूप, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।
कुछ प्रमुख बिंदु:
1. धार्मिक पर्यटन की परिभाषा और महत्व
2. भारत में प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल (वृंदावन, वाराणसी, शिर्डी)
3. धार्मिक पर्यटन का आर्थिक योगदान
- रोजगार सृजन
- स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा
4. चुनौतियाँ (संक्रमण, संरक्षण, प्रबंधन)
भारत एक बहुधार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं से परिपूर्ण देश है, जहाँ धार्मिक पर्यटन का विशेष महत्व है। धार्मिक पर्यटन न केवल आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में चारधाम, द्वादश ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ, बौद्ध तीर्थ, सिख गुरुद्वारे, सूफी दरगाहें तथा ईसाई तीर्थस्थल जैसे अनेक धार्मिक स्थल स्थित हैं, जो प्रतिवर्ष लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा योगदान आर्थिक विकास के रूप में देखा जा सकता है। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या से होटल, धर्मशाला, परिवहन, भोजनालय, स्थानीय हस्तशिल्प, फूल-प्रसाद और अन्य लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलता है। इससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में। धार्मिक पर्यटन के कारण सड़क, रेल, हवाई संपर्क, स्वच्छता, जल आपूर्ति तथा स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे बुनियादी ढाँचे का भी विकास होता है।सामाजिक दृष्टि से धार्मिक पर्यटन राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करता है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं, जिससे “विविधता में एकता” की भावना को बल मिलता है। साथ ही, धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन से भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रहती है। सरकार द्वारा “प्रसाद योजना” और “स्वदेश दर्शन योजना” जैसी पहलें धार्मिक पर्यटन को संगठित रूप से विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रही
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Pages:6-9
How to cite this article:
पूनम देवी, अमित चमोली " भारत के विकास में धार्मिक पर्यटन का योगदान". National Journal of Advanced Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 6-9
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