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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
कृषि आधुनिकीकरण एवं प्रौद्योगिकी युग की चुनौतियाँ
Authors
रूबी कुमारी, डॉ. शीला कुमारी
Abstract
यह शोधपत्र भारत में कृषि के आधुनिकीकरण के तकनीकी आयामों, उनके प्रभावों तथा उनसे उत्पन्न चुनौतियों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। स्वतंत्रता के समय जहाँ खाद्यान्न उत्पादन लगभग 50.8 मिलियन टन था, वहीं 2021–22 में यह बढ़कर 315 मिलियन टन के आसपास पहुँच गया है। इसी प्रकार कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई विस्तार तथा उर्वरकों के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आधुनिक समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन तकनीक, सटीक कृषि तथा जैव-प्रौद्योगिकी ने कृषि उत्पादन को अधिक वैज्ञानिक, डेटा-आधारित और कुशल बनाया है। डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से बाजार पारदर्शिता भी बढ़ी है। हालाँकि, इन प्रगतियों के साथ कई गंभीर चुनौतियाँ भी उभरकर सामने आई हैं, जैसे उच्च निवेश लागत, डिजिटल साक्षरता की कमी, ग्रामीण अवसंरचना की कमजोरी, पर्यावरणीय क्षरण, जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन तथा डेटा सुरक्षा संबंधी समस्याएँ। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें सरकारी रिपोर्टों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तथा शोध लेखों का विश्लेषण किया गया है। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया है कि कृषि आधुनिकीकरण तभी सफल होगा जब इसे समावेशी, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाया जाए। इसके लिए जलवायु-स्मार्ट कृषि, सामूहिक संसाधन उपयोग, प्रशिक्षण और नीति सुधार आवश्यक हैं।
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Pages:1-5
How to cite this article:
रूबी कुमारी, डॉ. शीला कुमारी "कृषि आधुनिकीकरण एवं प्रौद्योगिकी युग की चुनौतियाँ". National Journal of Advanced Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 1-5
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