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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
कबीर की उलटबांसियों में सूर्य-चंद्र प्रतीक एवं खगोलिक चेतना
Authors
डॉ. दिनेश कुमार यादव, डॉ. हर्षराज शुक्ला, मदन मोहन पाण्डेय
Abstract
इस शोध-पत्र में कबीर की उलटबांसियों में प्रयुक्त सूर्य-चंद्र प्रतीकों के महत्व एवं खगोलीय चेतना की व्याख्या की गई है। कबीर तुलसीदास-आदि भक्त कवियों से बिलकुल भिन्न दृष्टि रखते हुए साधना और जागरूकता की परक रूपकों के रूप में सूर्य और चंद्र का उपयोग करते हैं। आधुनिक खगोल विज्ञान के अनुसार सूर्य हमारे सौरमंडल का केन्द्रस्थ तारा है1, पृथ्वी का अक्ष 23.5° टिल्टेड है2, तथा चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है3,। इन वैज्ञानिक तथ्यों की रोशनी में कबीर के प्रतीकात्मक चित्रण को समझने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि कबीर ने अपनी रचनाओं में ब्रह्माण्ड की क्षण भंगुरता और दिव्यता को उजागर करने हेतु खगोलीय घटनाओं को बिंबित किया है। भारतीय वैदिक खगोल-परम्परा में भी सूर्य, चंद्र, ग्रह-नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है 4, 5 और कबीर का संवाद उसी चेतना की लोक परम्परा से जुड़ता है। इस प्रकार, कबीर की उलटबांसियों में सूर्य-चंद्र प्रतीक आधुनिक खगोलीय ज्ञान और भारतीय पारम्परिक खगोलीय चेतना का संगम प्रस्तुत करते हैं।
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Pages:42-43
How to cite this article:
डॉ. दिनेश कुमार यादव, डॉ. हर्षराज शुक्ला, मदन मोहन पाण्डेय "कबीर की उलटबांसियों में सूर्य-चंद्र प्रतीक एवं खगोलिक चेतना". National Journal of Advanced Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 42-43
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