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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
अद्वैत वेदान्त में अध्यास का स्वरूप
Authors
विवेक कुमार पाण्डेय
Abstract
भारतीय दर्शन में अग्रणीय अद्वैत वेदान्त, अपने मूल स्थापना में ’’ब्रह्म’’ की सत्ता को पारमार्थीक सत् के रूप में स्थापित करता है। ब्रह्म सत् के स्थापना के प्रतीरूप को एकमात्र सत् मानने के अनेतर अद्वैत वेदान्त में व्यावहारिक सत् और प्रातीभासीक सत् को भी सत्ता के स्तरीकरण के रूप में स्वीकार किया गया है। हालांकि अद्वैत वेदान्त में व्यावहारिक सत्ता और प्रातीभासिक सत्ता को ’’अध्यास-संसकी’’ या अध्यास जनीत बताया गया है, जो कि पारमार्थीक सत्ता की तरह सत् नहीं है, बल्कि इनकी सत्ता बाध्य है जो कि अध्यासोमुखी है। अद्वैत वेदान्त में जगत् की सत्ता और भ्रम के सत्ता को अध्यासोमुखी कहने तथा अध्यास का क्या स्वरूप है तथा यह किस प्रकार से जगत की सत्ता को प्रभावित करती है यह एक गहन चिन्तन के माध्यम से ही समझा जा सकता है।
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Pages:7-8
How to cite this article:
विवेक कुमार पाण्डेय "अद्वैत वेदान्त में अध्यास का स्वरूप". National Journal of Advanced Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 7-8
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