National Journal of Multidisciplinary Research and Development

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Vol. 6, Issue 2 (2021)

निर्मल वर्मा का चिन्तनः कहानी के संदर्भ में


Dr. Suman Rani Makkar

रचना रचनाकार के लिए आत्मखोज का साधन होती है। लेखक जितना अपनी आत्मा में डूबता हैए झांकता हैए उतनी ही सच्चाई से वह अपने अंतर्मन के विचार व्यक्त करता है। अनुभव कहानी नहीं होते। अनुभवों के घटित हो चुकने के बाद एक और प्रक्रिया ष्चिंतनष् की प्रक्रिया शुरू होती है जहां से गुजरे बिना अच्छी कहानी का निर्माण नहीं हो सकता अतः कला चेतना की उपज है। निर्मल वर्मा के चेतन स्तर पर स्मृतियाँ हावी रही हैं। निर्मल वर्मा का स्मृतियों को घटना स्तर तक लानाए घटना से कहानी का कर्म बनाना नाबोकोव के लेखन के सदृश्य ला खड़ा करता है। इसी तरह फ्रायडवादए टॉलस्टॉयए वर्जिनिया वुल्फ़ए हेडगरए मार्क्सवादी चिंतनए महर्षि रमन व देशी विदेशी संस्कृति काए साहित्य का धर्म व्यवस्थाओं का जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को वर्मा ने कहानियों के माध्यम से उकेरा है। निर्मल वर्मा का चिंतन पक्ष रचनाओं के लिए पाशर्वभूमि का निर्माण करता रहा है।
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