National Journal of Multidisciplinary Research and Development

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Vol. 5, Issue 1 (2020)

नारी विमर्श के परिप्रेक्ष्य मेंः ’पुण्यतोया’


दयानिधि सा

’पुण्यतोया’ एक नारी चऱि़त्र प्रधान उपन्यास है। एक ग्रामीण नारी का सात्विक चऱित्र इसमें चित्रित है। नारी को पुण्य पवित्र नदी के रूप में चित्रित करते हुए उसके संघर्षमय जीवन का सूक्ष्म चित्रण हुआ है। नारी का जीवन एक नदी के समान होता है। उसमे कितने उतार चढ़ाव उंच-नीच पहाड़,पर्वत,समतल मैदान होते हैं जिन्हें पार करती हुई वह अपने गन्तव्य स्थल समुद्र में समाहित होती है। नारी जीवन चुनौतियों से भरा हुआ होता है। नारी को अपने जीवन में अनेक घात-प्रतिघातों से जूझना पड़ता है। उसके जीवन पथ पर हर कदम पर खतरा मण्डराता रहता है। उसे समाज का लांछन, प्रताड़न,उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। नारी को अपने जीवन में अनेक भूमिका निभानी पड़ती है। कभी किसी की बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी भाभी, कभी बहू, कभी ननद, कभी मां,कभी सास, तो दादी, जाने कितने रिश्ते नारी को निभाने होते हैं। इन रिश्तों के निर्वाह में नारी अपनी संपूर्णता पाती है, सार्थकता पाती है।
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