National Journal of Multidisciplinary Research and Development

National Journal of Multidisciplinary Research and Development


National Journal of Multidisciplinary Research and Development
National Journal of Multidisciplinary Research and Development
Vol. 1, Issue 2 (2016)

असमीया साहित्य के इतिहास का रोमान्टिक काव्यधाराः एक अध्ययन (सन् 1889-1940 तक)


जयन्त कुमार बोरो

असमीया साहित्य में रोमामंटिक युग का प्रारम्भ सन् 1889 में प्रकाशित ‘जोनकी’ [1] पत्रिका के साधारणतः माना जाता है । रोमान्टिक युग या ‘रोमान्टिस्जिम’ [2] को असमीया साहित्य में एक साहित्यिक आन्दोलन के रुप में देखा गया । असम में इस युग को नवजागरण की संज्ञा के अभिहित किया गया । इस आन्दोलन का श्रीगणेश ‘असमीया भाषा उन्नति साधिनी सभा’ से होता है । उन्नीसवीं शताब्दी के अस्सी के दशक में कलकत्ता में अध्ययनरत असमीया छात्रों ने इस सभा को जन्म दिया । प्रारम्भ में यह सभा उन छात्रों के मेल मिलाप करने के लिए प्रति शनिवार को आयोजित होने वाली एक साधारण सभा थी । कलकत्ता में आये हुये असम के सभी विद्यार्थी एक साथ सम्मिलित होकर मेल-मिलाप करते थे । 25 अगस्त, सन् 1888 में कलकत्ता में शहर के मध्य ‘अ. भा. उ. सा. स.’ के नाम से एक विख्यात युगान्तकारी सभा का निर्माण किया । सभा के कम से कम बीस छात्रों के एक दल ने असमीया साहित्य में नवजागरण का चादर फैलाया । चन्द्रकुमार अगरवाला, हेमचन्द्र गोस्वामी और लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा इस दल के तीन प्रधान छात्र थे । इन तीनों छात्रों के अथक प्रयसों से ही सन् 1889 के जनवरी महीने में ‘जोनाकी’ नामक असमीया पत्रिका का प्रकाशन हुआ ।


Pages : 12-14 | 1638 Views | 715 Downloads