National Journal of Multidisciplinary Research and Development

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Vol. 6, Issue 3 (2021)

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में राजस्व पुलिस की भूमिका


जीवन चन्द्र परगॉई

उत्तराखंड भारत संघ के हिमालयी राज्यों की श्रेणी में 11वां राज्य है। उŸार प्रदेश के अलग होकर 01 नवम्बर, 2000 को देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। वर्तमान में इसमें 13 जनपद अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चम्पावत, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, उŸारकाशी, देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर एवं नैनीताल हैं। जनपद देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर एवं आंशिक रूप से नैनीताल मैदानी जनपदों की श्रेणी में आता है। अन्य नौ जनपद पर्वतीय जनपदों की श्रेणी में सम्मिलित हैं। उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियां भिन्न होने के कारण प्राचीन काल से ही यहां की प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी भिन्न हैं। यही कारण है कि उत्तराखंड देश का एक मात्र राज्य है जहां राजस्व पुलिस की व्यवस्था को लागू किया गया है। इस लेख के माध्यम से उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में प्रशासन एवं कानून व्यवस्था की इसी इकाई का उल्लेख करने का प्रयास किया गया है जो विभिन्न स्तरों पर प्रशासन की धुरी होने के बावजूद भी भारी उपेक्षा की शिकार होती रही है। उद्देश्यः राजस्व पुलिस के माध्यम से उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में ना केवल राजस्व वसूली, अनुशासन एवं अपराध को नियंत्रित करना है। बल्कि केन्द्र व राज्य की सभी जन कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने के साथ ही आम जनमानस तक इसका लाभ पहुंचाना है। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जनसंख्या नियंत्रण, कुपोषण मुक्त भारत, कोरोना संक्रमण से बचाव जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जोड़कर उŸाम एवं उन्नत उत्तराखंड के निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करना है। किसी भी स्थिति में ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की उपेक्षा करना न केवल प्रशासनिक सुधार की नीतियों के खिलाफ है बल्कि एक आदर्श राज्य के रूप में सुशासन के लिए भी घातक है। पर्वतीय क्षेत्रों में राजस्व कार्मिकों को पुलिस को अतिरिक्त कार्यभार गया है। अतिरिक्त दायित्व के रूप में काम का अधिक दबाव, सुविधाएं व संसाधनों के न होने से राजस्व पुलिस के कार्मिक स्वयं को आर्थिक, सामाजिक रूप से उपेक्षित महसूस करते है। सम्पूर्ण देश में राजस्व विभाग के कार्मिक प्रशासन की धुरी है। जिसके बगैर किसी भी योजना को आम जनमानस तक पहुंचाकर उसका लाभ दिलाना संभव नहीं है। अतः इस लेख का उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में राजस्व पुलिस के रूप में कार्यरत कर्मिकों की विशेष भूमिका को उजागर करते हुए एक कार्मिक के रूप में उनकी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा को संरक्षित करने का प्रयास किया गया है।
Pages : 05-07