National Journal of Multidisciplinary Research and Development

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Vol. 6, Issue 2 (2021)

राजिंदर सिंह बेदी विरचित ‘क्वारंटीन’ कहानी का पुनर्पाठ


चेतन विष्णु रवेलिया

समाज और साहित्य का घनिष्ट संबंध है| समाज ही वह जीवन रस है जिससे साहित्यरूपी बेल फलती – फूलती है| इस समाज में मानव की विभिन्न समस्याओं, उसके अस्तित्व, चिंताओं को सदैव साहित्य में जगह मिलती रही है| वर्तमान दौर में समूचा विश्व अभूतपूर्व महामारी ‘कोरोना’ से जूझ रहा है| इस महामारी से त्रस्त समाज और मानवजाति की त्रासदी को साहित्य में आज भी अभिव्यक्ति मिल रही है| इसी वर्तमान संदर्भ में उर्दू के प्रसिद्ध रचनाकार राजिंदर सिंह बेदी रचित ‘क्वारंटीन’ कहानी प्रासंगिक हो उठती है| कुछ रचनाएँ जितनी सटीकता से उस काल की नब्ज पकड़ती हैं उतनी ही सटीकता से आने वाले समय की भी और इसी क्रम में वें कालजयी सिद्ध होने लगती हैं| विवेच्य कहानी ‘क्वारंटीन’ आज के दौर में शत - प्रतिशत खरी उतरती है| प्रतीत होता है कि यह हमकालीन दौर में ही लिखी गई है और वर्तमान समय से संवाद करने को लालायित है|
Pages : 32-36