National Journal of Multidisciplinary Research and Development

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ISSN: 2455-9040

Vol. 4, Issue 2 (2019)

‘कामायनी’ काव्य में चेतना के विकास का अध्ययन

Author(s): डॉ. अमिय कुमार साहु
Abstract: यह शोध-लेख, जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘कामायनी’ में वर्णित चेतना के विकास पर आधारित है । मनुष्य जन्म से पशु प्रवृत्ति को लेकर आता है । बचपन से लेकर आगे तक की यात्रा में वह अपने चेतनत्व को पाप्त करता है जो उसे पशुत्व से अलग करता है । पर सभी मनुष्य में चेतनत्व होने के बावजूद, विभिन्न कारणों से वह उसे ऊर्ध्वता की ओर बढ़ा नहीं पाता और पशुत्व से आगे न बढ़ते हुए जीवन भर दुःख झेलता रहता है । मनुष्य का लक्ष्य, जो आनंद है, को पाने के लिए अपने चेतनत्व को उस ऊंचाइयों पर ले जाना होता है जहाँ मैं भाव का अंत होता है और संसृति की सेवा ही मनुष्य के चित का मूल उद्देश्य रह जाता है । तब जाकर वह परमानंद का भागी बनाता है । प्रसाद जी ने अपने इस काव्य में मनु के माध्यम से चेतना के विकास के विभीन्न सोपानों को उजागर किया है, जिसमें दर्शनिकता की पुट भी आ गई है । प्रसाद के काव्यत्व और प्रत्यभिज्ञा दर्शन की गहराइयों में जाकर चेतना-यात्रा के विभिन्न परतों को खोलना इस शोधलेख का उद्देश्य है ।
Pages: 32-40  |  141 Views  53 Downloads
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