National Journal of Multidisciplinary Research and Development


ISSN: 2455-9040

Vol. 2, Issue 2 (2017)

योग साधना में यम का महत्त्व

Author(s): प्रदीप
Abstract: मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। संसार में रहते हुए मनुष्य सभी सुख एवं शान्ति को भोगना चाहता है तथा विश्व में जो कुछ भी व्यक्ति कर रहा है, उसका एक ही लक्ष्य है कि उसे सुख मिलेगा। एक व्यक्ति नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व चाहता है कि राष्ट्र में शान्ति स्थापित हो। सभी लोग अपने-अपने विवेक के अनुसार इसके लिए कुछ चिन्तन करते हैं, परन्तु एक सर्वसम्मत मार्ग नहीं निकल पाता। अशान्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसका अर्थ है दुनिक के लोग जिन उपायों पर विचार कर रहे हैं, उनमें सार्थकता तो है, परन्तु परिपूर्णता, समग्रता एवं व्यापकता नहीं, परन्तु ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि दुनिया का हर इंसान उस रास्ते पर चल सके। क्या ऐसे कुछ नियम बन सकते हैं, जिस पर दुनिया का प्रत्येक इंसान चल सके और प्रत्येक व्यक्ति उस नियम को अपना सके, जिसकी अपनाकर जीवन में पूर्ण सुख, शान्ति एवं आनन्द प्राप्त कर सकते हैं। मनुष्य जीवन में एक ऐसा पथ है जिसको अपनाकर मनुष्य संपूर्ण जीवन को सुखपूर्वक जीवन जी सकता है। वह मार्ग है महर्षि पतंजलि द्वारा वर्णित अष्टांग योग के दो सोपान यम और नियम। इनको अपनाकर हम जीवन में आई सस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
Pages: 225-227  |  991 Views  293 Downloads
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